
Odisha ओडिशा: ओडिशा में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने हड़ताल में शामिल मेडिकल ऑफिसर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि जो डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं लौटते हैं, उनके खिलाफ वेतन रोकने और अनुबंधित डॉक्टरों की सेवा समाप्त करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (OMSA) के सदस्य, OMHS कैडर के डॉक्टर और कुछ कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत डॉक्टर 1 जुलाई से राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। डॉक्टरों की यह हड़ताल उनकी लंबित मांगों को लेकर शुरू की गई है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
सरकारी पत्र में कहा गया है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आती हैं, इसलिए इस तरह की हड़ताल को गंभीरता से लिया जा रहा है। सरकार ने 6 जनवरी 2026 के गृह विभाग के नोटिफिकेशन के माध्यम से ओडिशा एसेंशियल सर्विसेज (मेंटेनेंस) एक्ट, 1988 (OESMA) को लागू किया है। इस कानून के तहत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को हड़ताल करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह सीधे जनता की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करता है।
विभाग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि डॉक्टरों की हड़ताल के कारण आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है, जिसे सरकार ने गंभीर और अस्वीकार्य स्थिति बताया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जनता के अधिकारों के खिलाफ भी है।
इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हड़ताल में शामिल डॉक्टरों ने ओडिशा गवर्नमेंट सर्वेंट्स कंडक्ट रूल्स, 1959 के नियम 3 और 4 का भी उल्लंघन किया है। इन नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी और नियमित रूप से करें और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचें जो सरकारी सेवाओं को बाधित करे।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे OMHS कैडर के उन मेडिकल ऑफिसर्स की पहचान करें जो ड्यूटी से अनुपस्थित हैं और उनकी सैलरी तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। साथ ही, कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत डॉक्टरों को ड्यूटी से गैरहाजिर पाए जाने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई है।
सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना गंभीर मामला है, क्योंकि इसका सीधा असर मरीजों और आम जनता पर पड़ता है। इसलिए प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहता।
वहीं दूसरी ओर, हड़ताल कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें पूरा किए बिना काम करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन सेवाओं को बाधित करने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी।
राज्य में इस पूरे घटनाक्रम के चलते सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। कई जगह मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था करने और आपातकालीन सेवाओं को जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
कुल मिलाकर, ओडिशा सरकार और हड़ताली डॉक्टरों के बीच यह टकराव अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक तरफ सरकार सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।





